उमरिया-शहडोल में जुए का संगठित नेटवर्क सक्रिय, पुलिस पर उठे सवाल

 

क्षेत्र का बच्चा बच्चा
जानता है मुख्य सूत्रधारों के नाम, जिम्मेदार अनभिज्ञ

जुगुल मिश्रा की कलम से

एशियन रिपोर्टर शहडोल। जिले में एक बार फिर अवैध जुए के कारोबार ने
पैर पसार लिए हैं। उमरिया जिले के घुनघुटी चौकी क्षेत्र से लेकर शहडोल जिले के
सोहागपुर थाना क्षेत्र के जमुई और आसपास के जंगल इन दिनों कथित तौर पर जुए के बड़े
अड्डों में तब्दील होते जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार चार नाल काटने
वालों की एक चौकड़ी इस पूरे खेल का संचालन कर रही है
, जो स्थान बदल-बदलकर जुए का फड़ सजाती
है।

 

जंगल बना जुए का सेफ जोन

 

सूत्र
बताते हैं कि यह गिरोह पुलिस की नजर से बचने के लिए बार-बार अपना ठिकाना बदलता रहता
है। कभी घुनघुटी के सुनसान इलाके
, तो कभी जमुई के जंगलहर जगह रात ढलते ही जुए का खेल शुरू हो
जाता है। घने जंगलों में होने के कारण न तो आम लोगों की नजर पड़ती है और न ही
आसानी से कोई कार्रवाई हो पाती है।

 

हर दिन कटती है नाल’, लाखों का खेल

 

जुए
के इस खेल में रोजाना हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का दांव लगता है।
नालयानी कमीशन के रूप में मोटी रकम सीधे
संचालकों की जेब में जाती है। बताया जा रहा है कि हार-जीत से ज्यादा कमाई इस
नालसे हो रही है, जो इस पूरे कारोबार की असली रीढ़ बन
चुकी है।

 

युवाओं का भविष्य दांव पर

 

इस
अवैध गतिविधि का सबसे खतरनाक असर युवाओं पर पड़ रहा है। कम समय में ज्यादा पैसा
कमाने की चाह में युवा इस जाल में फंसते जा रहे हैं।

कई
परिवारों के लोग अपनी मेहनत की कमाई जुए में हारकर आर्थिक संकट में पहुंच चुके
हैं।

 

सूदखोरी का भी खेल जारी

 

जुए
के साथ-साथ यहां सूदखोरी का धंधा भी फल-फूल रहा है। हारने वाले खिलाड़ियों को वहीं
पर ब्याज पर पैसे दिए जाते हैं
, जिस पर 20 से 25 प्रतिशत तक का भारी ब्याज वसूला जाता है।

इस
कारण कई लोग कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं और धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति
पूरी तरह चरमरा रही है।

 

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

 

सबसे
बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि
इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन बिना जानकारी के संभव नहीं है। बावजूद इसके
, अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई
है।

लोगों
में चर्चा है कि आखिर क्यों बार-बार स्थान बदलने के बावजूद यह गिरोह हर बार बच
निकलता है
? क्या
सूचना तंत्र कमजोर है या कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है
?

 

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा

 

इस
मामले में स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से इस पूरे मामले में सख्त कार्यवाही की
अपेक्षा की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई
, तो आने वाले समय में यह समस्या और
विकराल रूप ले सकती है।

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