सतलापुर
में श्री श्री 1008
शतचंडी महायज्ञ
अनुष्ठान आज से
नौ दिवसीय नव कुंडीय यज्ञ अनुष्ठान में कोरोना महामारी शांति के
लिए होंगी विशेष आहुतियाँ
मंडीदीप से केशव सुनील की रिपोर्ट
रायसेन के औद्योगिक नगर मंडीदीप के उपनगर सतलापुर स्थित खेडापति माता मंदिर में श्री श्री 1008
श्री शतचंडी महा यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा लगातार
12 वर्षों से चली आ रही परंपरा को जीवित रखने आज बुधवार से अनुष्ठान प्रारम्भ किया जाएगा | जिसमें कोरोना
काल में शासन के निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हुए आयोजन संपन्न होगा |
लगातार 12वें
वर्ष के आयोजन में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 18 जोड़े करेंगे हवन
जानकारी देते हुए यज्ञ आचार्य पंडित राजेंद्र शर्मा ने बताया कि यह अनुष्ठान कोरोना महामारी
निवारण और
पर्यावरण शुद्धता के लिए किया जा रहा
है। यह अनुष्ठान यज्ञकर्ता बापचा धाम के प्रमुख मोहन बाबा के सानिध्य में किया जाएगा। जिसमें 11 ब्राह्मण 9
कुंडों पर 18 यजमानो से मंत्रों के साथ आहुतियां छुडवाएंगे। उन्होंने बताया
कि नौ दिवसीय
इस अनुष्ठान में सरकार की कोविड-19 गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। यजमानो को मास्क लगवाने के साथ बार-बार सैनिटाइजर से
हाथ साफ करवाए
जाएंगे। दिन में तीन बार पूरी यज्ञशाला
परिसर को सैनिटाइज किया जाएगा।
कोरोना प्रोटोकाल के
चलते मानसिक सहयोग की अपील – आयोजन
समिति के अध्यक्ष गौतम लौवंशी ने बताया कि परिसर में आगंतुकों की
संख्या पर सख्ती से नियंत्रण रखा जाएगा | कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए परिसर
में विशेष प्रबंध किये गए हैं | उन्होंने बताया कि मंदिर प्रांगण में आगंतुकों को
मास्क के साथ सैनिटाइज कराने के बाद ही
प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने रहवासियों से अपील की
है कि इस अनुष्ठान को सफल बनाने में तन और धन से नहीं अपितु
मानसिक रूप से अपना सहयोग प्रदान करें ।
मंदिर में आकर भीड़ बढ़ाने के बजाय घर से ही धर्म प्रभावना
करने की अपील की है।
कोरोना प्रोटोकाल के
चलते मानसिक सहयोग की अपील – आयोजन
समिति के अध्यक्ष गौतम लौवंशी ने बताया कि परिसर में आगंतुकों की
संख्या पर सख्ती से नियंत्रण रखा जाएगा | कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए परिसर
में विशेष प्रबंध किये गए हैं | उन्होंने बताया कि मंदिर प्रांगण में आगंतुकों को
मास्क के साथ सैनिटाइज कराने के बाद ही
प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने रहवासियों से अपील की
है कि इस अनुष्ठान को सफल बनाने में तन और धन से नहीं अपितु
मानसिक रूप से अपना सहयोग प्रदान करें ।
मंदिर में आकर भीड़ बढ़ाने के बजाय घर से ही धर्म प्रभावना
करने की अपील की है।


