बागी विधायकों की डिप्टी स्पीकर को हटाने की तैयारी, अयोग्य घोषित करने के अधिकार को चुनौती

 एक तरफ शिवसेना बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बागी विधायक डिप्टी स्पीकर को ही हटाने की मांग कर रहे हैं। गुवाहाटी में मौजूद शिंदे गुट के दो निर्दलीय विधायक महेश बाल्दी और विनोद अग्रवाल ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने के लिए नोटिस भेजा है। आपको बता दें कि डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल एनसीपी (NCP) के नेता हैं। इन्होंने डिप्टी स्पीकर द्वारा शिवसेना के एमएलए अजय चौधरी को सदन का नेता नियुक्त किए जाने का भी विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के बागी विधायकों की बैठक में उन्होंने डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने का प्रस्ताव लेने की योजना बनाई है। बागी गुट के 46 विधायकों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव तैयार करने के लिए काम जारी है।

शिवसेना की चाल का जवाब

दरअसल शिवसेना ने बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखा, जिसमें 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की। शिवसेना ने कल 12 और आज 4 और लोगों के नाम डिप्टी स्पीकर को भेजे। डिप्टी स्पीकर को अब इन 12 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग पर फैसला लेना है। इसी की प्रतिक्रिया में दो निर्दलीय विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेज दिया।

नोटिस से क्या होगा फायदा?

नोटिस भेजनेवाले दोनों विधायकों ने अरुणाचल प्रदेश के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए डिप्टी स्पीकर से अयोग्यता याचिका पर फैसला नहीं करने का आग्रह किया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकते हैं, यदि उनके खिलाफ “अविश्वास” प्रस्ताव लंबित हो। विधायकों में से एक महेश बाल्दी ने जिरवाल से कहा कि वह किसी को भी अयोग्य घोषित करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वे खुद अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विधायक अयोग्य घोषित किए गए तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

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